10 Lion Story in Hindi

Lion story in Hindi. शेर एक खूंखार जानवर है जिससे सब डरा करते हैं। शेर को जंगल का राजा कहा जाता है। शेर ताकत का प्रतीक भी है पर इस वजह से लोग शेर से जुड़ी कहानियां पढ़ना पसंद करते हैं। इसी वजह से हमने यहां आपके लिए कुछ शेर की कहानियों को इकट्ठा करके प्रस्तुत किया है। इन कहानियों को पढ़िए और देखिए और इसका मजा लीजिए। अंत में हमें जरूर बताना कि आपको यह कहानियां कैसी लगी?

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बूढ़ा शेर और लालची मनुष्य – Lion Story in Hindi

यह कहानी है एक शेर की। वह शेर समय के साथ-साथ बूढ़ा हो चला था और उसे अब शिकार करने में दिक्कत होती थी। उसका शरीर कमजोर पड़ चुका था और वह अब शिकार करने लायक भी नहीं था। जब कभी भी वह शिकार के लिए निकलता तो उसकी रफ्तार कम होने की वजह से बाकी के जानवर जल्दी दूर भाग जाते थे। इस वजह से वह भूखा रहने लगा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह किस तरह से अपना पेट भरेगा। अगर वह इसी तरह से भूखा रहा तो वह मर जाएगा।

तभी वह एक नदी के पास पानी पीने गया। पानी पीते-पीते उसने देखा कि दूर एक चीज चमक रही थी। ऐसे में वह उस चमकती चीज के पास गया। शेर ने देखा कि वह एक सोने का कंगन था। वह उस सोने के कंगन को देखकर सोचा कि वह उस कंगन के सहारे यहां से जाते हुए मनुष्य को लालच देगा और जैसे ही वे लोग उसके पास आएंगे उसे वह मारकर खा जाएगा।

वह नदी के किनारे बैठकर लोगों के आने का इंतजार करता था। तभी कुछ लोग नदी के दुसरी तरफ से जा रहे थे। शेर ने उनसे कहा, “यह देखो मेरे पास एक कंगन है और यह सोने का है। यह बहुत ही कीमती है इसे बेचकर तुम अच्छा धन कमा सकते हो। तुम चाहो तो इसे आकर ले सकते हो।”

वे लोग जानते थे कि शेर खूंखार होता है। इस वजह से कोई भी उसके पास नहीं गया और वे सब अपना जान बचाने के चलते वहां से चले गए। शेर ने यह तरकीब बहुत से लोगों के साथ आजमाई लेकिन कोई भी उसके चंगुल में नहीं फस रहा था। एक दिन एक बूढ़ा आदमी वहां से गुजर रहा था और नदी के उस पार शेर बैठ कर आराम कर रहा था।

शेर की नजर उस बूढ़े आदमी पर पड़ी। शेर ने उसे चिल्लाकर कहा, ‘मेरे दोस्त मैं बूढ़ा हो चला हूं। मैं चाहता हूं कि मैं लोगों को कुछ दान दूँ। यह देखो मेरे पास एक सोने का कंगन है मैं तुम्हें इसे देखकर पुण्य कमाना चाहता हूं ताकि मैं स्वर्ग जा सकूं। तुम आओ और इसे ले जाओ।”

वह व्यक्ति शेर की बात में आ गया और कंगन के लालच में वह शेर के पास जाने लगा। वह बूढ़ा व्यक्ति नदी में उतरा और चलते-चलते दूसरे किनारे की ओर जा पहुंचा। वहाँ दलदल था जिसकी वजह से वह बूढ़ा व्यक्ति वहां फंस गया था। वह जितना जोर लगाता था उतना ही वह उसमें फंसता जाता। शेर जान चुका था कि उसके जाल में वह व्यक्ति फस चुका है। तभी वह मौका देखकर उसके पास गया और उसे मारकर खा गया। इस तरह से शेर ने अपनी लंबी भूख मिटाई और वह अब अच्छा महसूस कर रहा था।

इस कहानी से हमें यह संदेश मिलता है कि हमें कभी भी अत्यधिक लालच नहीं करना चाहिए। ज्यादा लालच करने से हम मुसीबत में फंस सकते हैं या हमारी जान भी जा सकती है।

लालची शेर की कहानी

शेर और हिरण की कहानी – Lion Story in Hindi

एक घने जंगल में ढेरों जानवर रहा करते थे और उस जंगल का राजा एक शेर था। शेर जानवरों का शिकार करके उन्हें खा जाता था और इस तरह से वह अपना पेट भरा करता था। एक दिन शेर ने सोचा कि वह उस जंगल का राजा है तो फिर वह क्यों इतने लोगों का पीछा करते हुए उनका शिकार करता है। उझे तो सब को आदेश देकर अपने लिए खाना मंगवाना चाहिए।

इस वजह से शेर ने जंगल में ऐलान कर दिया कि वह अगले दिन जानवरों को जंगल का एक नया नियम बताएंगा। यह सुनते ही जंगल के सारे जानवर सोचने लगे कि वह नया नियम क्या हो सकता है? अगले दिन, सब एक जगह इकट्ठा हुए फिर शेर वहां आया। शेर ने सबको नया नियम सुनाया। वह नया नियम यह था कि एक-एक जानवर प्रतिदिन उसके गुफा में आएगा जिसे वह मारकर खा जाएगा। यह सुनते ही सारे जानवर डर गए लेकिन वह कर भी क्या सकते थे?

उन्हें राजा का आदेश मानना ही था। राजा ने हिरण को अपना सेवक बनाया और उससे कहा कि वह हर दिन एक जानवर उसके पास लेकर आएगा। हिरण शेर से बहुत डरता था इसलिए वह दबी आवाज में शेर से कहा, “जी हां, राजा मैं रोज आपके लिए एक जानवर लेकर आऊंगा।”

शेर के कहे अनुसार हिरन जानवरों को शेर के पास ले जाता है और शेर उनको मारकर खा जाता था। ऐसा कई दिनों तक चलता रहा और जंगल के जानवर इस वजह से परेशान थे। एक दिन अचानक जंगल में खूब बारिश हुई। बारिश की वजह से जंगल के सारे जानवर अपनी-अपनी जगह पर छुप गए लेकिन शेर बारिश का मजा लेना चाहता था। वह पूरी बारिश में दिन भर घूमता रहा और बारिश बंद होते ही वह अपनी गुफा में चला गया। अगले दिन जैसी ही उसकी नींद खुली तो उसका तबियत खराब था। उसे सर्दी और खांसी हो चुका था। वह दिन भर खास रहा था। तभी हिरन उसके पास आया और उससे बोला, “राजा आज मैं आपके खाने के लिए किस जानवर को लेकर आउ?” शेर बहुत खास रहा था जिसकी वजह से वह नहीं बोल पा रहा था। इसीलिए शेर ने हिरण को इशारे में वहां से जाने को कहा।

शेर की हालत दिन-प्रतिदिन बिगड़ती ही जा रही थी क्योंकि सर्दी और खांसी ठीक नहीं हो रहा था। वह भूखा रहने लगा था। तभी जानवरों ने शेर को तकलीफ में देखकर उसकी सहायता करने के बारे में सोचा। जंगल के सारे जानवर मिलकर अच्छे से अच्छा जड़ी-बूटी इकट्ठा करने लगे और फिर उसका काढ़ा बनाया। अब जानवरों को वह काढा शेर को देना था। ऐसे में सारे जानवर पीछे हट रहे थे क्योंकि वें शेर के पास नहीं जाना चाहते थे। तभी एक गोरिल्ला शेर को वह काढ़ा देने के लिए तैयार हो गया। वह शेर के पास गया और उसे वह काढ़ा देकर आया। तबीयत ज्यादा खराब हो जाने की वजह से शेर ने वह काढ़ा पीने का सोचा।

काढ़ा पीने के अगले दिन ही शेर की सर्दी और खांसी ठीक हो चुकी थी। अब वह भूखा था और उसे खाने की जरूरत थी। इस वजह से वह अपनी गुफा से बाहर निकला। जब वह गुफा से बाहर निकला तब उसने देखा कि एक हिरण घास चर रहा था। तब उसने हिरण का शिकार करने का सोचा। वह उस हिरन के नजदीक गया और घास खाने का नाटक करने लगा। हिरन ने देखा कि शेर घास खा रहा था। यह देखकर वह बहुत ही अचंभित था। तब उसने शेर से पूछा, “राजा आप घास क्यों खा रहे हैं?”

ऐसे में शेर जवाब दिया, “मैं घास इसलिए खा रहा हूं क्योंकि मैं समझ चुका हूं कि दूसरों को मारकर पेट भरना अच्छा नहीं है। इसीलिए मैं घास खा रहा हूं और घास खाने में मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। अब से मैं किसी भी जानवर का शिकार नहीं करूंगा।”

शेर की इन बातों पर वह हिरन विश्वास करने लगा और वह शेर के नज़दीक जा पहुंचा। मौका देखकर शेर ने तुरंत ही हिरण को धर दबोचा और उसे मारकर खा गया। फिर से शेर जंगल के जानवरों का शिकार करने लगा और उसका आतंक बड़ गया।

जंगल के बाकी जानवरों को समझ में आ गया था कि उनको शेर की जान नहीं बच आनी चाहिए थी। क्योंकि वह अपनी फितरत कभी नहीं बदलने वाला।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि लोग अपनी फितरत कभी नहीं बदलते इसीलिए हमें लोगों को परख कर उनपर भरोसा करना चाहिए। Lion Story in Hindi.

खरगोश और शेर की कहानी

घमंडी शेर और चालाक बाघ – Lion Story in Hindi

यह कहानी है एक घने जंगल की जहां का राजा एक खूंखार शेर था। वह इतना खूंखार था कि उससे जंगल के सारे जानवर डरा करते थे। वह राजा बहुत गुस्सा किया करता था और उल्टी-सीधी फैसले लिया करता। उसके इन्हीं फैसलों से जंगल के सारे जानवर बड़े परेशान रहते थे। उस शेर का एक सलाहकार भी था जो एक बाघ था।

एक दिन वह शेर अपने सलाहकार के साथ जंगल में भ्रमण कर रहा था कि तभी शेर ने देखा कि एक नदी उनके जंगल से होकर गुजरती है। तब वह शेर ने बाघ से पूछा, “यह नदी हमारे जंगल से होकर गुजरती है फिर यह नदी किस ओर जाती है?

शेर के इस सवाल पर बाघ ने जवाब दिया, “महाराज यह नदी हमारे जंगल से गुजरती है और फिर यह दूसरे जंगल की ओर चली जाती है जो पूर्व दिशा में है। वह जंगल दूसरे राजा का है।”

यह सुनते ही शेर क्रोधित हो उठा और हर बार की तरह इस बार भी उसने गलत फैसला लिया। शेर ने आदेश दिया की जंगल के सारे जानवर मिलकर इस नदी के सामने एक पत्थर का दीवार बनाएंगे जिससे की नदी का सारा पानी दूसरे जंगल में नहीं जाएगा। अपने राजा की यह आदेश सुनकर बाघ बाद बहुत चिंतित हो गया क्योंकि वह जानता था ऐसा करने से जंगल में बहुत सारी परेशानियां आ सकती है।

जंगल के सारे जानवरों ने मिलकर उस नदी पर पत्थरों की सहायता से एक बड़ा सा दिवार बनाया जो एक बांध की तरह था। ऐसा करने के बाद नदी का पानी आगे नहीं जा पा रहा था। धीरे-धीरे जंगल में सारा पानी भरने लगा और लोगों के घर डूबने लगे। परेशान होकर जंगल के सारे जानवर शेर के सलाहकार बाघ के पास के गए और उन्हें अपनी चिंता बताई। सब की समस्याओं को देखकर बाघ ने सबसे कहा, “आप सब शांत हो जाइए मैं तुरंत ही इस मामले पर कुछ करता हूं जिससे कि आप सबका घर डूबने से बच जाए।”

कुछ देर तक बाघ सोचने लगा कि वह ऐसा क्या कर सकता है जिससे कि वह अपने राजा शेर को मना सके? तभी उसके दिमाग में एक तरकीब सूझी और वह सीधा भालू के पास चला गया। भालू सुबह होने पर घंटी बजाया करता था और उस घंटी की आवाज से जंगल के सारे लोग उठ जाते थे। रात का समय था और सुबह होने में बहुत समय बाकी था। बाघ भालू को जाकर बोला कि वह घंटी बजा दे। यह सुनते ही भालू बोला, “मुझे माफ करना लेकिन मैं राजा से डरता हूं और मैं यह काम नहीं कर सकता क्योंकि अभी सुबह नहीं हुई है।”

भालू के डर को कम करने के लिए बाघ ने उससे कहा, “तुम डरो नहीं। तुम बस घंटी बजाओ आगे का काम मैं संभाल लूंगा।” यह सुनते ही भालू जोर-जोर से घंटी बजाने लगा और इसकी वजह से जंगल के सारे जानवर उठ गए। जंगल का राजा शेर भी उठ गया वह गुस्से में दहाड़ ने लगा और बोला, “यह क्या बेवकूफी है। अभी तो सुबह भी नहीं हुआ और भालू ने घंटी बजाना शुरू कर दिया।”

तभी बाघ उसके पास पहुंचा और उससे बोला, “महाराज भालू ने सही समय पर घंटी बजाई है।”

“लेकिन अभी भी अंधेरा है और सूरज निकला नहीं है तो तुम कैसे कह सकते हो कि सुबह हो चुका है?” शेर ने बाग से पूछा।

“महाराज हमने नदी में बह रही पानी को रोक दिया है जिससे कि दूसरे जंगल में पानी नहीं जा रहा। वहां के लोगों ने इस वजह से सूरज को रोक लिया है। वे तब तक सूरज को नहीं छोड़ेंगे जब तक हम यहां से पानी नहीं छोड़ेंगे।”

यह सुनते ही शेर बहुत ज्यादा गुस्सा हो गया और उसने कहा, “उनकी इतनी हिम्मत। जंगल के सारे जानवरों को तैयार करो हम उनसे लड़ाई करेंगे।”

“आप गुस्सा ना करें महाराज। मेरे पास लड़ाई से भी अच्छा सुझाव है जिससे हम बिना लड़े ही सूरज की रोशनी प्राप्त कर सकते हैं।” बाघ ने शेर को बताया। यह सुनते ही शेर शांत हुआ और बाघ से बोला, “अगर ऐसी बात है तो तुम मुझे बताओ कि हम क्या करें?”

“महाराज हमें नदी का पानी छोड़ देना चाहिए जिससे कि पानी उनके जंगलों में भी जा सके और बदले में वह हमें सूरज की रोशनी देंगे। हमें एक तरह का व्यापार करना होगा पानी के बदले सूरज की रोशनी।” बाघ ने कहा।

यह सुनते ही राजा शांत हुआ क्योंकि उसे बाग की यह तरकीब अच्छी लगी। शेर ने सबको आदेश दिया कि वे तुरंत जाकर उस दीवार को वहां से हटा दें। ऐसे में जंगल के सारे जानवर ने मिलकर नदी पर बनी हुई दीवार को हटा दिया और फिर कुछ देर बाद सूरज निकला। अब सब की समस्या खत्म हो चुकी थी। Lion Story in Hindi.

शरारती बंदर और शेर – Lion Story in Hindi

एक घने जंगल में एक बड़ा सा पेड़ था जिसमें तीन बंदर रहा करते थे। वे आपस में खुश थे लेकिन एक दिन एक शेर अपने सहयोगी लोमड़ी के साथ आकर पास के एक गुफा में रहने लगा। जिसकी वजह से तीनों बंदर घबरा गए और वे सोचने लगे कि शेर वहां से चला जाए। ऐसे में उन्होंने शेर से बात करने का सोचा। तीनों बंदर शेर की गुफा के अंदर गए और उनसे कहा, “आप यहां से चले जाए क्योंकि यह हमारा स्थान है। हम यहां रहते हैं और हम नहीं चाहते कि यहां कोई खतरनाक शेर रहे।”

यह सुनते ही शेर ने जवाब दिया, “मैं यहां से नहीं जाऊंगा। अब से यह मेरा स्थान है और मैं इसे नहीं छोड़ने वाला हूं। मैं और मेरा सहयोगी यही रहेंगे और तुम जो चाहे वह कर लो लेकिन हम यहां से नहीं जाएंगे। मैं तुमसे वादा करता हूं जब तक तुम मुझे परेशान नहीं करोगे तब तक मैं भी तुम्हें परेशान नहीं करूंगा।” शेर के साथ लोमड़ी ने भी कहा, “हाँ अब से यह हमारा स्थान है हम यहां से नहीं जाएंगे।”

ऐसे में वे बंदर और भी ज्यादा घबरा गए और उन्होंने फिर से कहा, “लेकिन हम यहां रहेंगे और कूदने से आपको दिक्कत होगी। इसी बात का हमें डर है।” बंदरों की विनती करने पर भी शेर नहीं माना और वह उस जगह रहने लगा। अब बंदर वहां से चले गए और पेड़ पर जाकर बैठ गए। बंदर आपस में सोचने लगे कि किसी भी तरह से उन्हें वहां से हटाना होगा नहीं तो उनके लिए मुसीबतें बढ़ सकती है।

ऐसे में बंदरों ने ढेरों प्रयास किए ताकि वे शेर को वहां से भगा सके। लेकिन शेर वहां से जाने का नाम ही नहीं ले रहा था। एक दिन शेर ने लोमड़ी को आदेश दिया, “यहाँ से चलकर नदी की तरफ जाना और वहां जाकर पानी पीना बहुत ही मेहनत का काम है। तुम आज से मेरे लिए पानी लेकर आओगे और एक बड़े से बर्तन में रख दोगी।”

शेर की बात सुनकर लोमड़ी ने कहा, “जी हुजूर आप जैसा कहेंगे मैं वैसा ही करूंगी।” इसके बाद लोमड़ी एक बडे से बर्तन में पानी भरकर रखने लगी। वह रोज उठकर नदी से पानी लाती और बर्तन में भर देती। पानी भरने के बाद वह वापस जंगल की ओर चली जाती। तभी बंदर मौका देखकर पेड़ से उतरते थे और उस बर्तन का पानी ऊपर से नीचे फेंक दिया करते थे। वे जहां रह रहे थे वह ऊचाई में था और नीचे खाली जमीन थी।

बंदर पानी को नीचे फेंक कर वापस पेड़ पर चढ़ गए। तभी शेर गुफा से निकला और उसने देखा कि बर्तन खाली था। ऐसे में वह गुस्सा होकर लोमड़ी के आने का इंतजार करने लगा। जैसे ही लोमड़ी वापस आई, तब शेर ने उसे चिल्लाकर कहा कि उसने अभी तक पानी क्यों नहीं भरा?

लोमड़ी ने कहा, “मैंने इसमें पानी भरा था लेकिन शायद यह गर्मी के चलते सुख गया होगा। मैं कल से इसमें और ज्यादा पानी भर दूंगी।” अगले दिन लोमड़ी ने उस बर्तन में और ज्यादा पानी भरा फिर वहां से चली गई। फिर से बंदर आए और उन्होंने उसका पानी नीचे फेंक दिया। शेर गुफा से निकला और उसने बर्तन खाली देखा। खाली बर्तन देख शेर फिर से गुस्सा हो गया और लोमड़ी के आने पर उसे जोर से चिल्लाया और उसे बोला, “तुम कामचोर हो गई हो। आज भी तुमने पानी नही भरा।” वहीं दूसरी तरफ बंदर यह सब देखकर बेहद खुश हो रहे थे और इस सब का आनंद ले रहे थे।

ऐसे में लोमड़ी सोचने लगी, “मैं तो हर दिन पानी भर्ती हूं लेकिन वह पानी जाता कहां है? कल मैं इसमें पानी भरकर छुपकर देखूंगी कि इसका पानी कहां चला जाता है।” लोमड़ी ने अगले दिन वही किया। वह उस बर्तन में पानी भरी और जाकर एक पेड़ के पीछे छुप गई। उसने देखा कि बंदरों ने सारा पानी नीचे फेंक दिया। यह देखते ही लोमड़ी को बहुत गुस्सा आया और वह सीधे शेर के पास गई। लोमड़ी ने शेर को सारी बात बताई।

शेर यह जानकर उस लोमड़ी से कहा, “तुम कल से दो अलग अलग बर्तन में पानी भरकर रखना। एक बर्तन बाहर रख देना और एक बर्तन गुफा के अंदर रख देना ताकि बंदरों को लगता रहे की वे हमें परेशान कर रहे है।”

लोमड़ी ने वैसा ही किया। वह एक बर्तन बाहर रहती है उसमें पानी भर देती और दूसरा भरा हुआ बर्तन गुफा के अंदर रख देती। बंदर आते और बाहर रखे हुए बर्तन में से पानी नीचे फेंक देते। कुछ दिनों तक यही चलता रहा और बंदरों को लगने लगा कि उनकी हरकतों से परेशान क्यों नहीं हो रहा? तभी उन लोगों ने देखा कि शेर शिकार के लिए जाता है और तुरंत शिकार को पकड़कर ले आता है। बंदर सोच में पड़ गए थे शिकार करने में तो बहुत समय लगता है लेकिन यह शेर इतना जल्दी शिकार कैसे कर लेता है?

तभी शेर उनके पास गया और उन्हें बताया, “तुम जो पानी नीचे फेंकते थे उसके अलावा भी हमारे पास पानी रहता है। जो हमारे गुफा के अंदर है। हम उसे पीकर काम चलाते हैं। और तुम जो पानी नीचे फेंकते थे उसकी वजह से नीचे घास उग गया है। वहां उस घास को खाने के लिए बहुत सारे जानवर आते हैं जिन्हें मैं बड़ी आसानी से पकड़ लेता हूं। इसी वजह से मुझे शिकार करने में समय नहीं लगता। तुम्हारी वजह से मेरा जीना और आसान हो गया है। यह सुनकर वे तीनों बंदर समझ चुके थे कि उनकी तरकीब काम नहीं कर रही और वे फालतू में ही शेर को परेशान कर रहें है।

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