कुम्हार की कथा The Potter Story In Hindi

कुम्हार की कथा The Potter Story In Hindi. एक गांव में किशन नाम का एक कुमार रहता था। वह बहुत ही मेहनती था जो दिन भर मिट्टियों के बर्तन बनाता और उन्हें बेचकर पैसे कमाता था। इससे उसका गुजारा हो जाता। लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी की कमाए हुए पैसों से वह शराब पिया करता था।

एक दिन उसकी अच्छी कमाई हुई तो उसने विचार किया कि वह रात को शराब पीने जाएगा। वह रात को शराब पीने गया और उसने बहुत सारा शराब पी लिया था। शराब पीकर जब वह वापस लौट रहा था तो नशे की हालत में वह सड़क पर गिर गया। सड़क पर एक कांच का टुकड़ा था जो उसके सर पर लग गया था। कांच की वजह से कुम्हार के सर पर गहरी चोट आई । उसके माथे से खून निकल रहा था। इसी हालत में वह घर गया और जाकर सो गया।

सुबह होते ही जब उसका नशा उतरा तो उसे अपनी सर पर बहुत दर्द हुआ। ऐसे में वह तुरंत एक वैद्य के पास गया। वैद्य ने उसकी चोट पर मलहम पट्टी की और इससे कहा, “मैंने तुम्हारा इलाज कर दिया है। लेकिन तुम्हारा यह घाव बहुत गहरा है। इसे ठीक होने में वक्त लगेगा जब यह ठीक हो जाएगा तो इस का निशान तुम्हारे सर पर हमेशा के लिए रह जाएगा।”

इसके बाद वह अपने घर चला गया। कुछ महीनों बाद उस गांव पर अकाल पड़ा। अकाल की वजह से गांव से लोग दूसरी जगह पलायन करने लगे। किशन भी उस जगह को छोड़कर दूसरी जगह चला गया। काम की तलाश में वह राजा के दरबार में गया। राजा ने उसे देखकर सोचा की इस व्यक्ति के सर पर गहरा निशान है लगता है कि यह कोई माहिर और पराक्रमी योद्धा है। जिसे युद्ध के दौरान सर पर चोट लगी है।

यह सोचकर राजा ने किशन को अपने राजमहल में अच्छा काम दिया। उसे एक ऊंचे पद काम काम मिला। अब किशन अपना काम बखूबी करने लगा था और राजा भी उस पर नजर रखा करते थे। किशन को ऊंचे पद में काम करता देख राजकुमार, मंत्री और अन्य लोग उसे जलने लगे थे। वह किसी ना किसी तरह से उसे वहाँ से हटाना चाहते थे।

एक दिन दुश्मनों ने उस राज्य पर हमला कर दिया। राजा ने अपनी सेना को तैयार किया और अपने साथ किशन को भी ले गए। जब वे एक साथ जा रहे थे तब राजा ने किशन से पूछा, “तुम्हारे सर में यह छूट किस युद्ध के दौरान लगी थी?”

यह सुनकर किशन सोचा कि राजा उसपर भरोसा करते हैं और वह उन्हें सब कुछ सच बताना चाहता था। यह सोचकर किशन ने राजा को बताया कि वह कोई योद्धा नहीं है बल्कि एक कुम्हार है। उसने अपने सर पर लगे हुए निशान का भी जानकारी दिया उसने राजा को बताया, “यह जो निशान आप मेरे सर पर देख रहे हैं। यह निशान मुझे युद्ध में नहीं बल्कि मैं नशे की हालत में जब घर वापस लौट रहा था तो एक कांच का टुकड़ा मेरे सर पर घुस गया था। यह चोट का निशान है।”

कुम्हार की कथा The Potter Story In Hindi
कुम्हार की कथा The Potter Story In Hindi

यह सब बातें सुनकर राजा क्रोधित हो गए और उससे बोले, “मैंने तुम्हें एक योद्धा समझकर अपने यहां काम दिया था। लेकिन तुमने मुझे धोखे में रखा। मैं चाहता हूं कि तुम अभी के अभी यहां से निकल जाओ और यहां कभी मत आना।”

“मुझे माफ करना महाराज लेकिन मैं आपके लिए युद्ध में जान भी दे सकता हूं।” किशन ने राजा से कहा।

यह सुनकर राजा ने उससे कहा, “नहीं तुम एक योद्धा नहीं हो और ना ही तुम योद्धा की कुल से हो। इसीलिए तुम लड़ाई नहीं कर सकते। समय रहते यहां से चले जाओ नहीं तो अगर राजकुमार को तुम्हारा सच पता चला तो वे तुम्हें मरवा देंगे।”

राजा की यह सब बातें सुनकर किशन वहां से चला गया। कुम्हार की कथा The Potter Story In Hindi.

Moral of The Potter Story In Hindi

What is the moral of The Potter Story In Hindi?

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमारा राज़ कभी ना कभी लोगों के सामने आ ही जाता है। इसीलिए चीजों को ना छुपाकर सच के रास्ते पर चलने में ही भलाई है। कुम्हार की कथा The Potter Story In Hindi.

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