स्वर्ग की यात्रा की कहानी- Akbar Birbal Story in Hindi

बादशाह अकबर के वज़िरो में से एक वजीर ऐसा भी था जो बीरबल से बहुत जला करता था। बीरबल की दौलत, शोहरत और उसी प्रसिद्धि से वह बहुत जलता था। उसका नाम अब्दुल था। एक दिन उसने बीरबल से बदला लेने का और उसे रास्ते से हटाने का सोचा। इसके लिए उसने राजा के खास शाही नाई के साथ मिलकर एक षड्यंत्र रचा।

Read in English – A Trip to Heaven – Akbar Birbal Story in English

बादशाह का नाई बादशाह के पास जाकर उनकी दाढ़ी और उनके बाल काटा करता है। एक दिन बादशाह अकबर ने अपने नाई को बुलाया ताकि वह अपनी दाढ़ी कटवा सके। नाई बादशाह अकबर की दाढ़ी काट रहा था कि तभी उसने बादशाह से कहां, “जहाँपनाह आप बहुत महान है। आपकी प्रसिद्धि सिर्फ और सिर्फ हिंदुस्तान में नहीं बल्कि पूरी दुनिया भर में है। आप सब के साथ इंसाफ करते हैं। लेकिन।”

“लेकिन क्या?” बादशाह अकबर ने उस नाई से कहा, “क्या बात है बताओ जरा हमसे कोई गलती हुई है क्या या फिर हमने किसी के साथ अन्याय कर दिया है?”

“नहीं नहीं आपने ऐसा कुछ नहीं किया है। आप सबका ध्यान बहुत अच्छे से रखते हैं। लेकिन क्या आपने कभी अपने पूर्वजों के बारे में भी सोचा है? क्या आपने उनकी हालचाल जानने की कोशिश की है?” नाई ने बादशाह अकबर से कहा।

“अच्छा हम तो वैसे उनकी बात किया करते हैं और प्रार्थना में उन्हें हम याद करते हैं। लेकिन इससे ज्यादा हम और कर भी क्या सकते हैं? वह तो अब स्वर्ग सिधार गए हैं”

“जी हां मैं जानता हूं कि वें सब स्वर्ग में है लेकिन आप स्वर्ग में भी तो किसी को भेजकर उनके हालचाल को जान सकते हैं” नाई ने चालाकी से बादशाह अकबर से कहा। यह बात सुनकर बादशाह अकबर चकित हो गए। उन्होंने नाई से पूछा, “स्वर्ग में जाकर ऐसा कैसे हो सकता है? कोई भला स्वर्ग में जाकर वापस आ सकता है क्या? यह नामुमकिन है।”

नाई बादशाह अकबर को अपनी बात मनाने की कोशिश करने लगा और कहा, “जी हां! मैं एक बाबा को जानता हूं जो लोगों को स्वर्ग में भेजते हैं और वहां से वापस भी लेकर आते हैं। मेरे अलावा उनके बारे में वजीर अब्दुल भी जानते हैं।”

बादशाह अकबर उसकी बातों में आ गए। उन्होंने उस नाई से कहा, “अच्छा अगर ऐसी बात है तो मैं तुरंत ही वजीर अब्दुल से बात करता हूं और किसी को स्वर्ग के लिए भेजता हूं ताकि वह मेरे पूर्वजों के बारे में जानकर बता सके।”

अगले दिन बादशाह अकबर ने वजीर अब्दुल को बुलाया। बादशाह ने अब्दुल से कहा, “अब्दुल हमने सुना है कि तुम एक ऐसे बाबा को जानते हो जो लोगों को स्वर्ग में भेजता है और उन्हें वहां से वापस भी लेकर आता है। मैं चाहता हूं कि तुम उस बाबा को यहां लेकर आओ।”

“जी हां हुजूर, आपकी जैसी आज्ञा। मैं तुरंत बाबा को यहां आपके सामने लेकर आता हूं।” अब्दुल ने बादशाह अकबर से कहा।

अब्दुल तुरंत ही जाकर उस बाबा को अपने साथ लेकर आया। बाबा ने बादशाह अकबर को सलाम किया। उसके बाद बाबा ने बादशाह अकबर से कहा, “बादशाह अकबर, आपने मुझे जिस काम के लिए यहाँ बुलाया है वह काम मैं कर सकता हूं लेकिन मुझे एक ऐसा व्यक्ति चाहिए जिसे मैं स्वर्ग पर भेज सकूं। वह व्यक्ति आपका कोई खास और भरोसेमंद होना चाहिए।”

यह बात सुनकर बादशाह अकबर सोचने लगे कि वह किसको स्वर्ग में भेज सकती है। तभी अब्दुल ने कहा, “बादशाह अकबर बीरबल आपका खास है और आप सबसे ज्यादा उसपर भरोसा करते हैं। तो क्यों ना आप उसे ही स्वर्ग के लिए भेज दे।”

“हां, तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो। बीरबल ही एक ऐसा व्यक्ति है जिसपर हम सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं।” बादशाह अकबर ने कहा।

इसके बाद बादशाह अकबर ने बीरबल को आदेश दिया, “बीरबल तुम स्वर्ग जाओगे और मेरे पूर्वजों का खबर लेकर आओगे। मैं जानना चाहता हूं कि मेरे पूर्वज कैसे हैं।”

बीरबल ने बादशाह अकबर की बात मानी और उनसे कहा, “जी हुजूर मैं जरूर ही आपकी आज्ञा का पालन करूंगा। लेकिन मेरे कुछ प्रश्न है जो मैं बाबा से पूछना चाहता हूं।”

तब बादशाह अकबर ने बीरबल से कहा, “हां, तुम अवश्य ही बाबा से जो सवाल है पूछ सकते हो। तब बीरबल ने उस बाबा से कुछ सवाल पूछे, “आप मुझे बताइए कि आप ऐसा क्या करने वाले हैं जिससे कि मैं स्वर्ग पर पहुंच जाऊंगा?”

तब उस बाबा ने जवाब दिया, “मैं एक वेदी बनाऊंगा और उसमें आग लगा दूँगा। जिसपर मैं तुम्हें भेजूंगा और तभी एक मंत्र पढूंगा। उसके बाद तुम स्वर्ग में पहुंच जाओगे।”

“अच्छा यह विधि आप कहां करने वाले हैं? बीरबल ने बाबा से एक ओर सवाल पूछा। फिर उस बाबा ने बीरबल के सवालों का जवाब दिया, “मैं यह विधि पवित्रा यमुना नदी के किनारे करने वाला हूं।”

फिर उसके बाद उस बाबा ने बादशाह अकबर से कहा, “बादशाह आज तक मैंने बहुत सारे लोगों को स्वर्ग में भेजा है लेकिन बहुत से लोग ऐसे भी है जो स्वर्ग की जिंदगी देखकर वापस नहीं आए। स्वर्ग कितना सुंदर और बेहतरीन है कि लोग वहां से वापस नहीं आना चाहते। इसीलिए आप फिर से सोच ले।”

फिर बादशाह अकबर ने जवाब दिया, “हां हां हमें बीरबल पर पूरा भरोसा है। वह जरूर जाएगा और वहां से वापस आएगा।”

बीरबल ने बादशाह अकबर से कहा, “जहाँपनाह मैं स्वर्ग के लिए जा रहा हूं और वहां मुझे लंबा समय लग सकता है। इसलिए मैं चाहता हूं कि चार-पांच दिनों तक मैं अपने परिवार वालों से बातचीत कर लूँ और मेरे जो बचे हुए काम है मैं उसे पूरा कर लूँ। तो मैं आपसे आज्ञा चाहता हूं कि मैं चार-पांच दिन के बाद इस विधि को पूरा करूंगा।”

बादशाह अकबर ने बीरबल को मंजूरी दी और उससे कहा, “हां बीरबल जरूर, तुम जैसा ठीक समझो।”

इसके बाद फिर सब अपने घर चलें गए। 5 दिनो के बाद विधि को पूरा किया गया। उस विधि के दौरान बादशाह अकबर और उनके सारे वजीर वहाँ मौजूद थे। बाबा ने वेदी पर आग लगाया और उसमें बीरबल हो जाने को कहा। तभी उन्होंने एक मन्त्र पढ़ा और बीरबल वहां से गायब हो गया।

विधि पूरा हो जाने के बाद सब वहां से वापस आ चुके थे। लेकिन बादशाह अकबर के मन में एक चिंता घर कर गई थी कि बीरबल कब वापस लौटेगा। देखते-देखते 2 महीने गुजर गए लेकिन बीरबल नहीं लौटा। तब बादशाह अकबर ने बाबा को बुलाने का आदेश दिया। बादशाह अकबर के आदेश के बाद बाबा उनके सामने पधारे। बादशाह अकबर ने उनसे सवाल पूछा, “दो महीने हो चुके हैं लेकिन बीरबल अभी तक लौटा नहीं है। आखिर क्या बात है?”

“मैंने आपसे कहा था कि बहुत सारे लोग ऐसे भी होते हैं जो स्वर्ग की जिंदगी को छोड़कर वापस नहीं आते। तो शायद बीरबल भी स्वर्ग में ही रहने लगा होगा और वह यहां वापस नहीं आना चाहता होगा। उस बाबा ने बादशाह से कहा।

तभी अचानक पीछे से बीरबल सभा में आया। बीरबल की लंबी-लंबी दाढ़ी और लंबे-लंबे बाल थे। बादशाह अकबर ने बीरबल को देखकर कहां, “बीरबल आओ! मैं तुम्हारी ही राह देख रहा था। तुम्हें देखकर मैं बहुत ही ज्यादा खुश हूं। लेकिन तुमने इतनी लंबी-लंबी दाढ़ी और बाल क्यों रखी है?”

तब बीरबल ने जवाब दिया, “जहाँपनाह स्वर्ग मैं आपके सारे पूर्वज बहुत ही अच्छे से हैं। लेकिन सब ने मुझ से एक शिकायत की है की स्वर्ग में एक भी नाई नहीं है। इसीलिए उन्होंने आपसे कहा है कि आप उनके लिए एक नाई भेजें और इसी वजह से मेरी भी दाढ़ी और बाल बढ़ चुकी है।”

इसके बाद राजा ने तुरंत अपने शाही नाई को बुलाया और आदेश दिया कि उसे भी स्वर्ग पर भेजा जाए। यह बात सुनकर वह नाई बादशाह के सामने गिड़गिड़ाने लगा और उनसे कहने लगा, “मुझे माफ कर दीजिए। मुझसे गलती हो गई है। यह स्वर्ग वाली बात सब झूठ है। ऐसा कुछ भी नहीं था यह सब वजीर अब्दुल की चाल थी और इस चाल में मैंने उनका साथ दिया था और वे बाबा भी एक ढोंगी है। उन्होंने भी इस षड्यंत्र में वजीर अब्दुल का साथ दिया था।”

इसके बाद बादशाह अकबर ने दोनों को सजा दी और वजीर अब्दुल से कहा, “मैं तुम्हें इस गलती के लिए मौत की सज़ा दे सकता हूँ। लेकिन, तुमने हमारी लंबे अरसे तक सेवा की है इसके चलते मैं तुम्हें छोड़ रहा हूं। लेकिन तुमने जो गलती की है इसकी सजा तुम्हें जरूर मिलेगी। मैं तुम्हें देश निकाला की सजा देता हूं। निकल जाओ मेरे देश से और यहां कभी भी वापस लौटकर मत आना।”

ऐसा कहने के बाद बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा कि आखिरकार बीरबल ने इनकी चाल कैसे समझ ली थी और उससे बचने के लिए उन्होंने क्या किया था? बीरबल ने बताया, “बादशाह मैंने इनकी चाल पहले से ही समझ ली थी और इनमें से मैंने सबसे कमजोर को पकड़ा और वह नाई था। मैंने आपसे चार-पांच दिन की मोहलत मांगी थी। इस दौरान मैंने यमुना नदी के किनारे एक सुरंग बनाई थी और वह सुरंग मेरे घर तक जाती थी। जिस वक्त वेदी पर आग जल रहा था तभी मैं उस सुरंग के अंदर कूद गया। वहां से मैं अपने घर पर जा पहुंचा। दो महीने तक मैं वहीं पर था। बीरबल की यह बात सुनकर अकबर बहुत ज्यादा खुश हुए और उन्हें बीरबल को शाबाशी दी।

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