Frog and The Ox Story in Hindi

Frog and The Ox Story in Hindi. जंगल के एक तालाब में बहुत ही ज्यादा मेंढक रहा करते थे। उस तालाब में मछलियों की तादाद कम थी। मेंढको का आकार अलग-अलग था। कुछ बहुत ही पतले थे, कुछ मोटे, छोटे और कुछ ज्यादा ही बड़े। पतले मेंढक लंबी छलांग लगाकर चट्टानों के ऊपर तक बैठ जाते। छोटे मेंढक छुपने में माहिर थे। बड़े मेंढक मुश्किल से छलांग लगाया करते और थोड़े आलसी हुआ करते थे।

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Frog and The Ox Story in Hindi

मेंढक और बैल की कहानी हिन्दी में

उन सबमें एक बड़ा सा मेंढक भी था वह अच्छा तंदुरुस्त मेंढक था उसका नाम मकाला था। मकाला अपने शरीर को लेकर बहुत ही ज्यादा घमंडी था। उसे अपने शरीर पर बहुत ही ज्यादा नाज़ था। सारें मेंढक बस यही जानते थे कि उन सब में सबसे ज्यादा बढ़ा और तंदुरुस्त मकाला ही है। उन्होंने मकाला से बड़ा किसी को भी नहीं देखा था।

मकाला दिनभर बैठकर बहुत सारे कीड़े-मकोड़े और मक्खियों को खाया करता। मकाला के चार छोटे-छोटे बच्चें भी थे जो अन्य बच्चों के साथ खेला करते।

एक दिन बच्चों ने मिलकर सोचा कि वे सब मिलकर इस तालाब से निकलकर कहीं और जाएंगे। उन्होंने वैसा ही किया। सब निकलकर पास में भ्रमण करने लगे। चलते-चलते उन्हें एक छोटा सा तालाब दिखाई दिया। उस तालाब का पानी बहुत ही साफ था और उन सब ने उस तालाब में डुबकी लगाई। वह सब एक दुसरे के साथ खेल रहे थे। वहां वे खूब मजे कर रहे थे।

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तभी अचानक आसपास की चीजें हिलने लगी। एक भयानक आवाज़ उनकी ओर आ रहा था। जिसकी वजह से वे सारे के सारे बच्चे डर गए और उस छोटे से तालाब से निकलकर पत्थरों के पीछे छुप गए। लेकिन उनमें से एक छोटा मेंढक वहां से नहीं निकल पाया। वह फिसल कर उसी तालाब में गिर गया। तभी उस तालाब में बड़ा सा बैल आया। उस बैल को आता देख वह बच्चा रोने लगा और उससे कहने लगा, “रुको! रुको! मुझे मत मारो। मुझे माफ कर दो। मैं तो बस यह खेलने आया था। मुझे मत मारो।”

उस बैल ने छोटे मेंढक की बात सुनी और उसे कहा, “मैं तुम्हें क्यों मारूंगा?” मैं तुम्हें नहीं मारूंगा। मैं तो यहां पानी पीने आया और मैं मेंढको को नहीं खाता।”

“मेंढक नहीं खाते तो फिर तुम क्या खाते हो?” उस बच्चे से बेल से पुछा।

“मैं घास खाता हूं, पेड़ों की पत्तियों को खाता हूं। लेकिन मेंढक को मैं नहीं खाता इसलिए तुम्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है।” बैल ने बच्चें को जवाब दिया।

बाकी मेंढक बच्चे पत्थर के पीछे छुपकर इन सब चीजों को देख रहे थे। जैसे ही बैल ने सबसे कहा कि वह मेंढक नहीं खाता तो वह सारे बच्चे निकलकर उसके सामने आ गए। उन सबने बैल के बारे में पूछा, “तुम मेंढक नहीं खाते यह तो अच्छी बात है। अच्छा बताओ तुम्हारा शरीर इतना बड़ा कैसे हो गया? हमारा शरीर तो छोटा-छोटा है। लेकिन तुम बहुत ज्यादा बड़े हो। हमारे यहां मकाला नाम का एक मेंढक है जो हम सबसे बड़ा है। लेकिन उसका आकार तुम्हारे आकार का आधा भी नहीं है।”

यह बात सुनकर बैल हंसने लगा, “हा हा हा हा, तुम मुझे देखकर सोच रहे हो कि मैं सबसे बड़ा हूं लेकिन ऐसा नहीं है। मुझसे भी बड़े-बड़े जीव जानवर यहां मौजूद है।”

बैल ने उन बच्चों को ढेर सारी बातें बताई और वह सारे के सारे उस बैल की बातें सुनकर चकित थे। बैल ने बच्चों को हाथी के बारें में बताया। पूरी बात होते-होते रात हो चली थी। इसीलिए बैल और मेंढक सब अपने-अपने घर वापस लौट गए।

बच्चों ने सारी बातें मकाला को बताइ। मकाला यह सुनकर यह बात मानने को तैयार नहीं था कि उससे बड़ा भी कोई हो सकता है। लेकिन उसके बाकी दोस्त यह जानते थे कि बाहर की दुनिया में और भी बड़े-बड़े जीव जानवर रहते हैं। मकाला खुद को बड़ा बताने के लिए अपने शरीर में हवा भरना शुरू किया। हवा भरते ही उसने सब से पूछा, “बताओ कौन सबसे बड़ा है?”

सब ने उसे समझाने की कोशिश की कि ऐसा करने से कुछ भी नहीं होगा। मकाला ने और सांस भरी जिससे कि उसका शरीर और थोड़ा सा फूल गया। उसने फिर से वही सवाल पूछा, “बताओ सबसे बड़ा कौन है?”

सब ने उसे समझाने की कोशिश की कि ऐसा करने से वह खुद को नुकसान पहुंचा रहा है लेकिन मकाला सुनने को तैयार ही नहीं था। उसने फिर से अपने शरीर में हवा भरी इससे उसका शरीर पूरी तरीके से फूल चुका था। उसकी आंखें लगभग-लगभग बाहर आ चुकी थी और वह बहुत लाल हो चुका था। सब ने उसे बार-बार समझाया, “मत करो ऐसा। इससे तुम्हें नुकसान हो सकता है।”

लेकिन मकाना बिल्कुल भी नहीं सुना उसने और सास भरा। फिर कुछ देर बाद उसका शरीर गुब्बारे की तरह फुट गया और वह मर गया।

मोरल ऑफ़ द स्टोरी – इसीलिए कहते हैं कि हमें अपने किसी भी चीज पर ज्यादा घमंड नहीं करना चाहिए। घमंड पतन का कारण बनता है। ज्यादा घमंड करने से वह इंसान एक न एक दिन मुहँ की जरूर खाता है। Frog and The Ox Story in Hindi.

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