Rapunzel Story in Hindi

Rapunzel Story in Hindi रपुंज़ेल की कहानी। बहुत समय पहले दूर किसी जंगल के पास एक भयानक किला था। उस किले मैं एक डायन रहा करती थी जिसका नाम डेम गोथेल था जो कि ढेर सारे काले जादू किया करती। गोथेल की एक परेशानी थी कि उसे कोई बच्चा नहीं हो सकता था। वह चाहती थी कि उसका एक बच्चा हो जिसे वह अपनी जादू और अपने ढेर सारे जादुई राज़ उसे दे सकें। लेकिन ऐसा नहीं हो सकता था।

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रपुंज़ेल के माता-पिता

वही उस जंगल के पास एक छोटा सा कस्बा भी था जहां एक दंपत्ति रहा करती थी। दंपत्ति में मर्द खेती किया करता और उसकी पत्नी अपने घरों का काम करती और अपने पति की सेवा करती।

एक दिन उसकी पत्नी ने एक खुशखबरी सुनाई। पत्नी ने अपने पति से कहा, “मेरे पेट में एक बच्चा पल रहा है।”

यह खबर सुनकर उसका पति बहुत ही खुश हुआ और उसने अपनी पत्नी से कहा, “मैं आज बहुत खुश हूं। यह तो बहुत ही अच्छी खबर है कि हमारे घर भी एक बच्चा आने वाला है।”

बच्चे के आने की खबर सुनकर दोनों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। वे दोनों खुशी-खुशी अपना काम करते रहे और पति ने अपनी पत्नी का बहुत अच्छे से ख्याल रखा। लेकिन कुछ दिनों बाद पत्नी बीमार पड़ गई। उसे एक ऐसी बीमारी हुई थी जिसका इलाज किसी को नहीं पता था। पति ने बहुत सारी दवाइयां उसे खिलाई ताकि वह जल्द से जल्द ठीक हो जाए और उसका बच्चा भी स्वस्थ तरीके से बाहर आ जाए। लेकिन ढेरों कोशिश करने के बावजूद भी वह स्वस्थ नहीं हो रही थी।

ऐसे में गांव के एक ज्ञानी वैद्य ने उससे कहा, “तुम्हारी पत्नी का इलाज सिर्फ और सिर्फ एक ही कर सकती है।”

“जी हां आप मुझे बताइए कि किस तरह से मैं अपनी पत्नी का इलाज सही तरीके से कर सकता हूं।”

“ऐसे में उस वैद्य ने कहा इसके लिए तुम्हें जंगल में जाना होगा। वहां पर एक भयानक सा किला है जिसमें एक डायन रहती है। उसके पास तुम्हारी पत्नी की बीमारी का इलाज है। तुम उसके पास जाकर मदद मांग सकते हो।

यह सुनकर वह किसान तुरंत ही जंगल की ओर रवाना होने के लिए तैयार होने लगा। जब वह तैयार हो रहा था तो उसकी बीमार पत्नी ने उससे पूछा, “क्या बात है? तुम कहां जा रहे हो इतनी हड़बड़ी में?”

“मैं जंगल की ओर जा रहा हूं। मुझे पता चला है कि तुम्हारी बीमारी का इलाज वहां मुझे मिल सकता है।”

पति ने पत्नी से कहा, “अच्छा ठीक है लेकिन तुम अपना ध्यान रखना और जल्दी से जल्दी लौट आना।”

Rapunzel story in Hindi

दवाई वाली पत्ती

इसके बाद वह व्यक्ति तुरंत ही जंगल की ओर रवाना हो गया। लंबी दूरी तय करने के बाद आखिरकार वह उस किले के सामने पहुंच गया। किले के पास पहुंचते ही उसने दरवाजा खटखटाया और कुछ देर तक इंतजार किया। लेकिन अंदर से कोई आवाज नहीं आया। उसने वह इन्तज़ार किया फिर भी कोई बाहर नहीं आया। ऐसे में उसने और ज़ोर से दरवाजा खटखटाया और बोला, “अंदर कोई है क्या? मुझे मदद की जरूरत है।”

कुछ देर बाद अंदर से चुड़ैल बाहर आई और उसने बड़े गुस्से से कहा, “क्या बात है? तुम्हें जरा सा भी डर नहीं है क्या? अगर मैं चाहूं तो पल भर में तुम्हें खत्म कर सकती हूँ।”

ऐसे ही मैं उस व्यक्ति ने कहा, “नहीं-नहीं मुझे माफ कर दीजिए। लेकिन मैं आपको यूं ही परेशान नहीं करना चाहता। मुझे आपसे ऐसी दवाई चाहिए जिससे कि मैं अपनी पत्नी को ठीक कर सकूं।”

“यहां से जाओ मेरे पास कोई ऐसा दवाई नहीं है जिससे मैं किसी को ठीक कर सकूं। किसी दूसरे वैद्य के पास जाओ।” डायन ने उस आदमी से कहा।

“देखिए मैंने बहुत सारी कोशिश कर ली लेकिन मेरी पत्नी ठीक नहीं हो रही है। मैं चाहता हूं कि आप मुझे उसे ठीक करने की दवाई दे। मेरी पत्नी के पेट में बच्चा है। अगर वह ठीक नहीं हुई तो वह मर जाएगा। व्यक्ति ने कहा।

बच्चे की बात सुनकर डायन कुछ देर तक सोचने लगी। फिर उसने उस व्यक्ति की मदद के लिए हां कर दिया। डायन ने कहा, “ठीक है। तुम यहाँ रुको मैं अंदर से दवाई लेकर आती हूं।”

गोथेल अंदर गई और वहां से कुछ पत्ते लेकर आई। पत्ते लेकर आने के बाद उसने उस व्यक्ति से कहा, “जाओ इसे अपनी पत्नी को रोज़ थोड़ा-थोड़ा खिलाना इससे वह ठीक हो जाएगी।”

वह व्यक्ति गोथेल से पत्तियाँ लेकर तुरंत ही अपनी पत्नी के पास पहुंचा और उसे वह खिलाने लगा। वह रोज उसे थोड़ा-थोड़ा खिलाता। कुछ समय बाद उसने देखा कि उसकी पत्नी ठीक होने लगी थी। करते-करते वह पूरी तरह से ठीक हो चुकी थी लेकिन पत्तियों के खत्म हो जाने के बाद उसकी तबीयत फिर से खराब होने लगी। ऐसे में वह व्यक्ति फिर से परेशान हो गया।

वह फिर उस डायन के पास जा पहुंचा। गोथेल के पास पहुंचते ही उसने फिर से दरवाजा खटखटाया और अंदर से वह डायन बाहर आई।

गोथेल ने उसे कहा, “अब क्या हो गया? मैंने तुम्हें वह दवाई दि थी। अब तुम यहां किसलिए आए हो।”

“आपने जो दवाई दी थी वह खत्म हो चुकी है। कुछ दिनों तक उसने वह दवाई लिया और वह बिल्कुल ठीक थी। लेकिन दवाई खत्म होते ही वह फिर से बीमार होने लगी है। इसलिए मैं आपके पास और पत्तियाँ लेने के लिए आया हूं।” उस व्यक्ति ने गोथेल से कहा।

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डायन की चाल

वह डायन चालाक थी। वह जानती थी कि वह आदमी दवाई लेने वापस जरूर आएगा और इस बार वह अपनी चाल में कामयाब हो गई। उस डायन ने कहा, “ठीक है, मैं तुम्हें दवाई के साथ-साथ उन पौधों के बीच भी देती हूं जिनमें यह पत्तियां होती है। लेकिन मेरी एक शर्त है। अगर तुम उन शर्तों को मानोगे तो ही मैं तुम्हें यह बीज दूंगी।”

“जी हां कहिए मैं आपकी हर एक शर्त को मानने के लिए तैयार हूं।” उस व्यक्ति ने चुड़ैल से कहा।

“अगर तुम्हारी संतान लड़की होगी तो तुम्हें उसे मुझे देना होगा।” गोथेल ने उस आदमी से कहा।

यह सुनकर वह आदमी घबरा गया और गुस्सा होकर डायन से कहने लगा, “ऐसा कभी भी नहीं हो सकता मैं अपने बच्चे को तुम्हें नहीं दूंगा।”

यह कहकर वह व्यक्ति वहां से चला गया। जब वह घर पहुंचा तो उसने देखा कि उसकी पत्नी बहुत ही ज्यादा बीमार थी। वह उसका ख्याल रखने लगा लेकिन दिन निकलते जा रहे थे और उसकी तबीयत ठीक नहीं हो रही थी। ऐसे मैं उसने निर्णय किया कि वह फिर से उस चुड़ैल के पास जाएगा। वह जानता था की अगर वह ऐसा नही करेगा तो उसकी पत्नी और बच्चे दोनों मर जाएँगे।

वह उस डायन के पास गया और उसके शर्त को मान गया। उसने गोथेल से कहा, “मैं आपकी शर्त को मानने के लिए तैयार हूं और आप मुझे उन दवाइयों का बीज दे दें। जिससे कि मैं अपनी पत्नी को ठीक कर सकूं।”

यह सुनकर गोथेल बहुत ही ज्यादा खुश थी और उसने वह बीज उसे दे दिया। वह व्यक्ति तुरंत उन बीजों को लेकर अपने खेतों में लगा दिया। देखते ही देखते कुछ ही दिनों में उनमें से पत्तियां निकलने लगी। उसने उस पत्तियों को तोड़ा और अपनी पत्नी को खिला दिया। Rapunzel Story in Hindi रपुंज़ेल की कहानी

रपुंज़ेल का जन्म

धीरे-धीरे उसकी पत्नी ठीक होने लगी और इस बार उसे दवाई की कमी भी नहीं थी। समय बीतता गया और उसकी पत्नी ठीक हो चुकी थी। अब उसके बच्चे के बाहर आने का समय हो चुका था। उसकी बेटी हुई।

जैसी उसकी बेटी हुई तो गोथेल उसके घर पर आ गई और उसने उस बच्चे को छीन लिया। बच्चे को हाथ में लेकर उसने कहा, “इसका नाम रपुंज़ेल होगा।”

वहीं दूसरी तरफ राजमहल में एक राजा रहता था। उसकी पत्नी भी पेट से थी। जिस दिन उस लड़की का जन्म हुआ था। उसी दिन राजकुमारी के बेटे का भी जन्म हुआ। दोनों का जन्म एक ही दिन हुआ और आगे जाकर यही दोनों एक दूसरे के साथ ही जीने वाले थे।

चुड़ैल उस बच्ची को लेकर जंगल में ले गई। चुड़ैल का उस जंगल में एक लंबा सा टावर था। जहां वह उसे ऊपर ले जाकर रखी और उसका ख्याल रखने लग गई। वह उसका बहुत अच्छे से ख्याल रखती। रपुंज़ेल धीरे-धीरे बड़े होने लगी थी और वह डायन उसका बहुत अच्छे से ध्यान रखती। गोथेल उसके पास रोज आती और उसके बालों में कंघी किया करती।

सुबह के समय वह रपुंज़ेल को जंगलों में ले जाया करती और उसके साथ खेला करती। कभी-कभी चुड़ैल उसके साथ नहीं होती तो रपुंजल जंगल में मौजूद चिड़िया, पंछी, छोटे-छोटे जानवर इन सब के साथ खेला करती। वह प्रकृति के आनंद लिया करती। रपुंज़ेल अब बडी हो रही थी और डायन ने कभी भी उसके बाल नहीं काटे थे।

एक दिन गोथेल बाहर से वापस आई तो उसने टावर के नीचे से रपुंज़ेल को आवाज़ लगाई, “रपुंज़ेल! रपुंज़ेल! अपने बाल नीचे करो। मुझे अपने बाल देखने दो।” फिर रपुंज़ेल ने अपने लंबे बाल खिड़की से नीचे की।

गोथेल ने देखा की रपुंज़ेल के सिल्की बाल इतने बड़े हो चुके थे और वह जमीन तक पहुंच जाते थे। डायन उसके बालों को पकड़ कर ऊपर की ओर चढ़ गई। ऊपर पहुचते ही उसने एक मंत्र पढ़ा और उसने टावर की सीढ़ियों को तोड़ दिया और उसके अंदर आने के रास्ते को भी पूरी तरह से बंद कर दिया। ऐसा करने के बाद रपुंज़ेल बाहर नहीं जा सकती थी। वह सिर्फ और सिर्फ उसी टावर में रहती और बाहर के नजारे देखा करती।

वह डायन सुबह को रपुंजल को छोड़कर उस टावर से निकल जाती और रात होते ही उस टावर पर वापस आ जाती। गोथेल उतरने के लिए रपुंज़ेल के बालों का इस्तेमाल करती और चढ़ने के लिए भी रपुंज़ेल के बालों का ही इस्तेमाल करती थी। ऐसे करते-करते समय बीतता गया। Rapunzel Story in Hindi रपुंज़ेल की कहानी

राजकुमार और रपुंज़ेल

दूसरी तरफ राजा का बेटा राजकुमार भी अब बहुत बड़ा हो चुका था। राजा की तबीयत अब धीरे-धीरे खराब होने लगी थी और राजा को इस बात की चिंता थी कि राजा का राज्याभिषेक करना है और उसके लिए एक राजकुमारी का भी चयन करना है। आस-पास की राजकुमारियां राजा के पास आया करती लेकिन राजकुमार को कोई भी पसंद नहीं आता।

एक दिन राजकुमार कुछ सैनिकों के साथ भ्रमण पर निकले। रास्ते में राजकुमार को घना जंगल दिखाई दिया। राजकुमार ने अपने सैनिकों से कहा, “हम इस जंगल से होकर जाएंगे।”

यह सुनकर राजकुमार के सैनिकों ने कहा, “राजकुमार हम सब इस जंगल से नहीं जा सकतें। यह जंगल जादुई और खतरनाक है। यहां जाना खतरे से खाली नहीं, कहते हैं कि यहां कोई भी जाता है तो वह वापस नहीं आता।”

राजकुमार बहुत साहसी था और इन सब अफवाहों को नहीं मानता था। ऐसे में राजकुमार ने कहा, “ऐसा कुछ नहीं होगा। चलो तुम मेरे साथ डरो मत।”

सब के सब जंगल के अंदर जाने लगे और अंदर पहुंचते ही वह जंगल को देखने लगे। उन्हें ऐसा कुछ भी नहीं दिखाई नही दिया जिससे कि वह डर जाए। कुछ दूर चलने के बाद उन्हें एक मधुर स्वर में गाने की आवाज सुनाई दी। यह गाना रपुंज़ेल गा रही थी। राजकुमार गाना सुनकर उसकी ओर आकर्षित हो चुका था। फिर वह पेड़ के पीछे छुपकर गाना सुन रहा था।

कुछ देर बाद वह डायन वहां पर आई और उसने चिल्लाया, “रपुंज़ेल अपने बाल नीचे करो और मुझे ऊपर आने दो।” डायन की आवाज सुनकर रपुंज़ेल ने अपने बाल नीचे फेंके। उसी की बालों को पकड़कर गोथेल टावर के ऊपर चढ़ गई। यह सारी चीजें राजकुमार छुपकर देख रहा था। उसके बाद भर राजकुमार वहां से वापस चला गया।

अगले दिन राजकुमार ने निर्णय किया कि वह वहां फिर से जाएगा और उस लड़की से मिलेगा। राजकुमार अकेले-अकेले अपने घोड़े के साथ जंगल की ओर चला गया। टावर के पास पहुंचकर चिल्लाने लगा रपुंज़ेल अपने बाल नीचे करो और मुझे ऊपर आने दो। रपुंज़ेल यह आवाज सुनकर घबरा गई और वह तुरंत खिड़की के पास आकर देखने लगी कि कौन उसे पुकार रहा है?

रपुंज़ेल ने पहली बार एक लड़के को देखा था। रपुंज़ेल नीचे थी और राजकुमार नीचे। दोनों एक दूसरे से ढेर सारी बातें करने लगे। राजकुमार के साथ बात करके रपुंज़ेल को पता चल चुका था कि उसे उससे कोई खतरा नहीं है। तब रपुंज़ेल ने अपने बाल नीचे फेंके और उसके बाल को पकड़कर राजकुमार टावर के ऊपर चढ़ गया। दोनों ने ढेर सारी बातें की।

बात करते-करते राजकुमार ने उससे पूछा, “तुम यहां क्या कर रही हो। बाहर की दुनिया बहुत ही ज्यादा खूबसूरत है। तुम्हे वहां चलना चाहिए। इस कैद में रहकर कैसे जी सकती हो।”

रपुंज़ेल ने कहा, “मेरी मां नहीं चाहती कि मैं बाहर की दुनिया में जाऊं। वहां पर बहुत ही ज्यादा बुराई है और बहुत ही खराब लोग हैं।”

यह बात सुनकर राजा ने कहा, “हाँ, बाहर की दुनिया में बुराइयां है लेकिन वहां अच्छाइयां भी है। वहां देखने को भी बहुत कुछ है। ढेर सारे लोग हैं, नदी, पहाड़, झरने, सुंदर-सुंदर महल आदि सब कुछ है। तुम्हें यहां रहकर अपनी जिंदगी बर्बाद नहीं करनी चाहिए।”

रपुंज़ेल राजकुमार की बात को सुनकर सोचने लगी कि राजकुमार की बात बिल्कुल सच है। मुझे यहाँ से बाहर निकलना चाहिए। Rapunzel Story in Hindi रपुंज़ेल की कहानी

रपुंज़ेल की आज़ादी

इसके बाद राजकुमार ने रपुंज़ेल के बाल काटे और उसे खिड़की से बांध दिया। दोनों के दोनों बाल के सहारे नीचे उतर गए। राजकुमार रपुंज़ेल को लेकर अपनी महल की ओर चला गया। कुछ देर बाद जब डायन वहां पर वापस आई तो उसने देखा कि बाल पहले से ही नीचे गिरे हुए थे। गोथेल ने सोचा कि रपुंज़ेल उसे दूर से ही देख चुकी होगी इसीलिए उसने अपने बाल नीचे फेंक दिए है।

डायन बालों के सहारे ऊपर चढ़कर देखती है। उसने देखा कि अंदर कोई नहीं था ना वहां से रपुंज़ेल जा चुकी थी और उसके बाल खिड़की से बंधे हुए थे। ऐसे में गोथेल बहुत ही ज्यादा गुस्सा होने लगी और उसने गुस्से से कहा, “रपुंज़ेल तुमने मुझे धोखा दिया है मैं इसका बदला जरूर लूंगी।”

फिर वह राजकुमार रपुंजल को अपने महल ले गया। महल में जाकर उसने देखा कि उसके पिताजी बिल्कुल ठीक थे और उनकी बीमारी भी जा चुकी थी। राजकुमार ने जब पूछा कि आप किस तरह से ठीक हुए तो राजा ने बताया, “मेरे पास एक व्यक्ति आया था जिसके पास मेरी बीमारियों का इलाज था। उसने मुझे रपुंज़ेल नाम के पेड़ के पत्ते खिलाए थे।”

रपुंज़ेल नाम सुनकर दोनों के दोनों चौक गए। फिर इसके बाद राजा ने राजकुमार और रपुंज़ेल को उस व्यक्ति की कहानी सुनाई जिसने राजा को ठीक किया था। सारी बातें सुनकर दोनों को समझ में आ गया था कि रपुंज़ेल के असली माता-पिता कौन है और वे कहां पर है?

यह सब जानने के बाद रपुंज़ेल और राजकुमार दोनों के दोनों रपुंज़ेल के माता-पिता के पास गए। रपुंज़ेल अपने घर के सामने खड़े होकर दरवाजा खटखटाने लगी। अंदर से उसकी मां बाहर आई। उस औरत ने देखते ही पहचान लिया था कि वह रपुंज़ेल है और वह उसकी बेटी है। इस तरह से उन दोनों माता-पिता को उनका खोया हुआ बच्चा वापस मिल गया।

इसके बाद राजा ने डायन गोथेल को उसके बनाएँ हुए टॉवर मे ही कैद करवा दिया।

तो यह थी रपुंज़ेल की कहानी Rapunzel Story in Hindi। अगर आपको यह रपुंज़ेल की कहानी Rapunzel Story in Hindi अच्छी लगी है तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें और कमेंट के माध्यम से हमें जरूर बताएं की यह कहानी आपको कैसी लगी?

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