Dinosaur Short Stories For kids in Hindi

Dinosaur Short Stories For kids in Hindi – पढ़े Dinosaur की मज़ेदार कहानियाँ हिन्दी में।

खुखार T-Rex DINOSAUR SHORT STORIES FOR KIDS IN HINDI

Tyrannosaurus rex एक प्रचलित डायनासोर है क्योंकि इस डायनासोर का इस्तेमाल फ़िल्मों मे बहुत बार किया गया है। इस कहानी में हम देखेंगे की कैसे करोडो साल पहले जंगल के जानवरों ने सबको Tyrannosaurus rex से बचाया।

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Story 1 DINOSAUR KI KAHANI HINDI ME

करोड़ो साल पहले जंगल के जानवर एक खुखार डायनासोर Tyrannosaurus rex से बहुत परेशान थे। यह डायनासोर बहुत खुखार था और वह जब भी आता जंगल के तीन से चार जानवरों को एक बार मे खा जाता। कभी-कभी 4 से 5 डायनासोर एक साथ आया करते।

इसको देख जंगल के सारें जानवर परेशान थे। आए दिन उन्हे इस परेशानी का सामना करना पड़ता। कई बार ये डायनासोर उनका घर भी उजाड़ दिया करते।

एक दिन जंगल के राजा बब्बर शेर ने एक सभा बुलाई। उस सभा में सब इस बात का हल निकालने वाले थे की किस तरह से वें डायनासोर Tyrannosaurus rex से बचा जा सकता है।

सभा के लिए सारें जानवर बब्बर शेर के पास आए। बब्बर शेर ने एक दमदार दहाड़ के साथ सभा की शुरुआत की। शेर ने सबसे पुछा, “बताओं की ऐसा क्या किया जाए जिससे हम उस डायनासोर Tyrannosaurus rex से बच सके?”

Dinosaur Short Stories For kids in Hindi
Dinosaur Short Stories For kids in Hindi

सभा मे बैठे हुए बंदर ने कहा, “मैं छलांग लगाकर उसके गर्दन को पकड लूंगा और फिर वह सास नहीं ले पाएगा।”

सबने उसका मज़ाक उडाते हुए कहा, “तुम पागल हो क्या? तुमने अपना और उसका शरीर देखा है? वह तुमसे बहुत बड़ा है आराम से तम्हें कुचल देगा।”

बंदर ने कहा, “तुम मुझे नहीं जानते मैं बहुत ताकतवर हूँ। अगर यकिन नहीं होता तो आजमा कर देख लो।”

बंदर की बात को काटते हुए लोमड़ी बोला, “तुम क्या ताकत दिखाओगे। हमें उसे बल से नहीं बुद्धि से हराना होगा।”

बब्बर शेर को लोमड़ी की बात में सच्चाई नज़र आई। शेर ने पुछा,”अच्छा, तो बताओ लोमड़ी महास्य हमें ऐसा क्या करना होगा?”

लोमड़ी ने कहा, “इसके लिए हमें चील और बाज़ की मदद लेनी होगी।”

यह सुनकर दोनों आगे आए और कहा, “हम दोनों तैयार है बोलों करना क्या है? हम अपनी जान तक दे देंगे।”

इसके बाद लोमड़ी ने सबको अपनी तरकिब बताई। अब सब तैयार थे। सब इस बात का इन्तज़ार कर रहे थे की कब वह डायनासोर Tyrannosaurus rex आयेगा।

कुछ दीनो बाद ऐसा ही हुआ। वह खुखार डायनासोर Tyrannosaurus rex आया और जंगल पर हमला कर दिया। लेकिन इस बार सब तैयार थे। उसके आते ही सबसे पहले बाज़ और चील ने डायनासोर Tyrannosaurus rex की आँख में हमला किया।

हमले के बाद डायनासोर ठीक से नहीं देख पा रहा था। फिर तुरंत बंदरों ने उसके पैर को रस्सी से बाँध दिया और डायनासोर Tyrannosaurus rex ज़मीन में जा गिरा।

डायनासोर के गिरते हि सारें जानवरों ने उसपर हमला कर दिया और डायनासोर चिल्लाने लगा, “मुझे जाने दो। मुझे मत मारो।”

सबने कहा, “अच्छा तुमने जो हमारे लोगो को मारा। हमें परेशान किया, उसका क्या? तुम्हारी यही सज़ा है की तुम अब नहीं बच सकते।”

डायनासोर ने कहा, “अगर तुम मुझे मारोगे तो मेरे साथी मेरी तलाश में आयेंगे और यहाँ जबर्दस्त तबाही लाएंगे।”

जानवरों ने उसकी एक बात ना सुनी और जंगल के राजा बब्बर शेर ने सीधे उसके गर्दन पर हमला किया। इससे डायनासोर Tyrannosaurus rex का अन्त हुआ।

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डायनासोर Tyrannosaurus rex को मरा देख सब खुश हुए। अब वक़्त था जश्न मनाने का। जंगल मे लोग बहुत खुश थे। सबने मज़े से जश्न का मज़ा लिया।

अब सब जंगल मे खुश थे लम्बे समय तक वहाँ किसी ने हमला नहीं किया। लेकिन सबको डायनासोर Tyrannosaurus rex की चेतावनी याद थी।

समय बिता और एक दिन अचानक 5 डायनासोर ने एक साथ जंगल में हमला किया। पुरे जंगल में सब घबरा गए और डरने लगे। सारें जानवर छोटी-छोटी गुफाओं ओर सुरंगों मे छुपकर इन्तज़ार करने लगे की कब वे डायनासोर वहाँ से जायेंगे?

लंबे समय तक इन्तज़ार करने के बाद अचानक आसमान से बड़े-बड़े आग के गोले बरसने लगे। उस आग के गोले ने सारें डायनासोर को खतम कर दिया।

अब जंगल में कोई डायनासोर नहीं बचा। सारें जानवर बाहर निकलकर खुशी-खुसी जीवन बिताने लगे। अब जंगल में सब ठीक था।

लंबी गर्दन Dinosaur Short Stories For kids in Hindi

सालों पहले तरह-तरह के डायनासोर हुआ करते थे। उनमें से कुछ मांस खाया करते थे और कुछ पेड़ पत्ते खाकर जिया करते थे। इस कहानी में हम ऐसे डायनासोर के बारे में बात करेंगे जिसकी गर्दन बहुत ही लंबी हुआ करती थी। और इस तरह के डायनासोर को sauropods कहा जाता है। तो चलिए जानते हैं कि आखिर क्या होता है इस बच्चों की कहानी में।

Story 2 of Dinosaur in hindi

Dinosaur Short Stories For kids in Hindi
Dinosaur Short Stories For kids in Hindi

लाखों-करोड़ों साल पहलें हमारें इस धरती पर डायनासोर रहा करते थे। उनमें तरह-तरह के जानवर हुआ करते थे। लेकिन यहाँ बात हो रही है चार्ली की, जिसका गर्दन बहुत लम्बा था। चार्ली इस बात को लेकर बहुत परेशान रहता था। एक दिन चार्ली को उसके दोस्तो ने अपने घर पार्टी के लिए आमंत्रित किया।

पार्टी की खबर सुनकर चार्ली खुब खुश हुआ और वह पुरे दिन पार्टी के लिए तैयार होने में लगा दिया। वह सबसे पहले अपना ब्लैक कोट पहना ओर गले एक टाई लगाकर तैयार हो गया।

चार्ली गाना गुनगुनाते हुए नाचते हुए अपने दोस्त के घर की ओर निकल पड़ा। अब वह अपने दोस्त के घर जा पहुचा। लेकिन, वह घर के अन्दर नहीं जा सका क्योंकि चार्ली की गर्दन बहुत लंबी जी। इससे लोग उसका मज़ाक उड़ाने लगे। सबकी बात सुनकर चार्ली उदास हो गया और वहाँ से चल पड़ा।

चार्ली उदास होकर जंगल की ओर चलता गया और उदास होकर एक पेड़ के पास टिक कर सो गया।

सुबह का समय हो चला था और सूरज की किरणें चार्ली के आँखो पर पड़ने लगी। इस वजह से उसकी नींद खुल गई। नींद से उठते ही उसे रोने की आवाज़ सुनाई देने लगी। रोने की आवाज़ सुनकर वह इधर-उधर देखने लगा लेकिन उसे रोता हुआ दिखाई नहीं दिया।

चार्ली ने आवाज़ लगाई, “कौन है जो रो रहा है?”

“ये मैं हूँ मुझे हर दिन इस तरह से रोना पड़ता है”

“लेकिन तुम हो कौन मुझे दिखाई क्यों नहीं दे रहे?” चार्ली ने फिर सवाल पुछा।

फिर उस आवाज़ ने कहा की यहाँ नीचे देखो यहाँ।

फिर चार्ली ने नीचे देखा और उसने देखा की एक छोटा पौधा उससे बात कर रहा है। चार्ली ने उस पौधे से पूछा, “आखिर तुम रो क्यों रहे हो?”

उस छोटे से पौधे ने कहा, “मैं बहुत छोटा हूं सूरज की रोशनी मुझ तक नहीं पहुंचती जिसके चलते मैं अपना खाना नहीं बना पाता। मेरे ऊपर बड़े-बड़े पेड़ है वह सूरज की रोशनी मुझ तक पहुंचने से रोक देते। इस वजह से मैं परेशान होकर रो रहा हूं।”

“अगर मुझे धूप की रोशनी ऐसे ही ना मिली तो मैं ठीक से बडा नहीं हो पाऊंगा। अब तुम बताओ कि मैं क्या करूं मेरे अलावा भी ऐसे छोटे-छोटे पेड़ है जिन्हें सूरज की रोशनी नहीं मिलती और इस वजह से वे लोग भी परेशान है।”  पौधे ने चार्ली से कहा।

चार्ली बहुत देर तक सोचा कि आखिर ऐसा क्या किया जाए कि छोटे-छोटे पौधों तक सूरज की रोशनी पहुच जाए। बहुत देर तक सोचने के बाद उससे सोचा कि क्यों ना मैं इन बड़े-बड़े पेड़ों के पत्तों को खा लू जिससे छोटे पौधों तक रोशनी पहुंच जाएगी।

चार्ली ने ऐसा ही किया। चार्ली ने धीरे-धीरे बड़े बड़े पेड़ों के पत्ते खाने शुरु किए। लेकिन उसने सारे पत्ते नहीं खाए। नहीं तो, बड़े पेड़ अपने खाना कैसे बनाते? पत्तो को खाने के बाद सूरज की रोशनी नीचे तक पहुंचने लगी और छोटे-छोटे पौधे भी सूरज की रोशनी का लाभ उठाने लगे।

रोशनी पाकर छोटे-छोटे पौधे अपना खाना बनाना शुरू करने लगे और वह सारे के सारे खुश हो गए। खुश होने के बाद उन्होंने चार्ली को शुक्रिया कहा और उसे अपना हीरो मानने लगे।

इन सब को देखने के बाद चार्ली बहुत ही खुश हुआ और वह बीती हुई रात की बात को भूल कर मजे से जीना शुरु कर दिया। अब वह खुश था।

यह जरूरी नहीं है कि हमारे साथ हर दिन बुरा हो और हर दिन हमारे साथ अच्छा हो। हमे इस बात को अपना लेना चाहिए की जीवन में अच्छी और बुरी घटनाएं जरूर होंगी। लेकिन मायने रखता है तो वह यह है कि हम उस वक्त क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

अगर आपको Dinosaur Short Stories For kids in Hindi की ये दो कहानियाँ अच्छी लगी तो हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताए।

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