मोसेस – Moses Bible Story in Hindi

Moses Bible Story in Hindi – बच्चों जब-जब लोगों पर ज़ुल्म और पाप बढ़ता है। तब ईश्वर का नेक बंदा ज़रूर जन्म लेता है। ईश्वर उसे राह दिखाते है और उसकी मदद करते है। ऐसा ही एक व्यक्ति था जिसने मिस्त्र के हिब्रू लोगों को ज़ालिम राजा से आज़ाद कराया और एक नए राष्ट्र का निर्माण किया। उस ईश्वर के नेक बंदे का नाम मोसेस था। ईश्वर ने मोसेस को एक नेक काम के लिए इस धरती पर भेजा था। तो चलिए जानते है मोसेस की पूरी कहानी।

मोसेस का जन्म

यह उस समय की बात है जब मिस्त्र का राजा फेरों हुआ करता था जो हिब्रू लोगों को गुलाम बनाकर रखता था। वह बहुत ही ज़ालिम था और उसे इस बात की चिंता थी की हिब्रू लोगों की संख्या बढ़ती जा रही थी। फेरों डरने लगा था की अगर हिब्रू लोगों की संख्या बढ़ने लगी तो आगे चलकर वें मिस्त्र पर राज करने लगेंगे। इसीलिए फेरों ने अपने लोगों को आदेश दिया की हिब्रू लोगों के बच्चे अब जन्म नहीं लेंगे। उसने हिब्रू लोगों के पहले पुरुष बच्चों को मारने का आदेश दिया।

फेरों की यह खबर पुरे मिस्त्र में फ़ैल गई। लोग अपने बच्चों को बचाने के लिए नए-नए तरकीब खोजने लगे। वही मोसेस का जन्म हो चूका था। मिस्त्र में जोचेबेड नाम की एक महिला रहा करती थी। जोचेबेड इस बात से चिंतित रहने लगी की वह किस तरह से अपने बच्चें को बचाएगी। जोचेबेड ने अपने बच्चें को एक बास्केट में रखा और उसे लेकर नदी के किनारे ले गई जहाँ फेरों की बेटी नहाने आया करती थी।

जोचेबेड ने रोते हुए ईश्वर से हुए प्रार्थना की, “ईश्वर मेरे बच्चें का ख्याल रखना।”

बच्चों माता और पिता के लिए उनकी संतान ही सबकुछ होती है। अगर बच्चों को कुछ हो जाए तो माता-पिता बहुत दुखी और परेशांन होते है। और अपने से दूर जाता देख उन्हें बहुत दुःख होता है। इसलिए मोसेस की माँ भी बहुत उदास थी।

जिस जगह पर जोचेबेड ने अपने बच्चें को छोड़ा था। वहाँ फेरों की बेटी आई उसने देखा की वहाँ एक छोटा बच्चा बास्केट मे रखा हुआ था और उसके आस-पास कोई भी नही था। राजकुमारी को उस अकेले बच्चें को देख दया आ गई। राजकुमारी ने बास्केट को उठाया और उसने निर्णय लिया की वह उस बच्चें को पालेगी और बड़ा करेगी। राजकुमारी ने उस बच्चें का नाम मोसेस रखा जिसका मतलब ‘नदी से निकाला हुआ’ है।

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मोसेस की परवरिश

मोसेस की परवरिश एक राजकुमार की तरह होने लगी उसे हर एक सुख-सुविधा दी गई जो एक राजकुमार को दी जाती है। समय के साथ-साथ मोसेस बड़ा हो चूका था और उसे यह भी पता चल चूका था की वह एक हिब्रू है।

मोसेस को इस बात से बहुत तकलीफ हुआ करती थी की मिस्त्र के लोग हिब्रू लोगों पर अत्याचार करते और उन्हें गुलाम बनाकर रखते। एक दिन मोसेस ने देखा की एक मिस्त्र का आदमी एक हिब्रू गुलाम को मार रहा था। गुस्से में आकर मोसेस ने उस मिस्त्र के आदमी को मार डाला।

मोसेस को बाद में अहसास हुआ की उसने एक बहुत बड़ी गलती कर दी है। उसने निर्णय लिया की वह उस जगह को छोड़ कर कही और चला जाएगा और वह मिस्त्र से निकलकर दूसरी जगह जाने लगा ताकि वह खुदको बचा सके। वह 40 साल तक छुपकर रहा।

ईश्वर का आदेश

एक दिन ईश्वर ने अपने होने का संकेत मोसेस को दिया। मोसेस के सामने एक पेड़ पर आग जलने लगी। वहाँ से ईश्वर की आवाज़ मोसेस के कानों में गूंजने लगी। वह आवाज़ ईश्वर की थी। ईश्वर ने मोसेस से कहा, “मोसेस, मैंने मिस्त्र में अपने लोगों की पुकार सुनी है। वें सब दुखी है और उनपर रोज़ अत्याचार होता है। मैं चाहता हूँ कि तुम वहाँ जाओ और उन्हें आज़ाद करवाओ और उन्हें ऐसी जगह ले जाओ जहाँ दूध और शहद की नदियाँ बहती हो, जहाँ सुख और समृद्दि हो। “

ईश्वर की बात सुनकर मोसेस ने कहा, “जी ईश्वर मैं वैसा ही करूँगा जैसा आपने कहा।”

“मिस्त्र के राजा फेरों से कहो की वह लोगों को आज़ाद करें। अगर वह तुम्हारी पहली विनती न सुने तो तुम अपने हाथ फेलाओ और अपना चमत्कार दिखाओ। मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा” ईश्वर ने मोसेस से कहा।

मोसेस ने वही किया जैसा ईश्वर ने उससे कहा था। वह मिस्त्र की ओर चल पड़ा और मिस्त्र पहुंचकर फेरों को समझाने लगा की वह लोगों को आज़ाद कर दे नहीं तो पुरे मिस्त्र पर ईश्वर का श्राप लगेगा। लेकिन फेरों ने उसकी एक बात न सुनी। ऐसे में मोसेस ने फेरों के सामने अपनी छड़ी फेकि और वह छड़ी तुरंत सांप में बदल गया। उस सांप को मोसेस ने उठाया वह वापस से छड़ी बन गया।

यह सब देख फेरों ने मोसेस से कहा, “तुम्हे क्या लगता है की मैं इस तरह के छोटे-मोटे जादू से दर जाऊंगा। ऐसा मेरे जादूगर भी कर सकते है। मैं तुम्हारे लोगों को कभी आज़ाद नहीं करूँगा।” ऐसा कहकर फेरों मोसेस को इनकार कर देता है।

इसके बाद मोसेस सोचने लगा की वह क्या करेगा। इसके बाद मोसेस अपना छड़ी नदी में डाला जिसके बाद नदी का पानी खून में तब्दील हो गया और नदी की सारी मछलियाँ मर गई। यह सुब देखकर भी फेरों ने लोगों को आज़ाद करने से मना कर दिया।

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ईश्वर का मिस्त्र पर प्रकोप

अब ऐसे में मोसेस नही समझ पाया की अब वह क्या करेगा? वह ईश्वर से प्रार्थना करता है, “हे ईश्वर मेरें दो बार कोशिश करने पर भी फेरों नहीं माना अब आप ही बताए की मई क्या करू। मुझे रास्ता दिखाए मेरें ईश्वर।”

“मोसेस मेरे बच्चें अब पुरे मिस्त्र में मेरा कहर बरसेग,” ईश्वर ने मोसेस से कहा।

इसके बाद अचानक पुरे मिस्त्र में बड़ी मात्रा में मेंढक आने लगे। पुरा मिस्त्र मेंढको से भर चुका था। यह सब देख फेरों घबरा गया और मोसेस के पास जाकर कहने लगा, “मोसेस, मैं तुम्हारे ईश्वर के सामने हार मानता हूँ। इन मेंढको को यहाँ से हटाओ मैं तुम्हारे लोगों को आज़ाद कर दूँगा।”

मोसेस ने ईश्वर से प्रार्थना कि और कुछ दिनों में मेंढकों की संखया कम होने लगी। अब फेरों को लोगों को आज़ाद करना था। लेकिन फेरों अपने वादे से मुकर जाता है और वह हेब्रु गुलमो को आज़ाद करने से इनकार कर देता है और लोग फिरसे कैद में रह जाते है।

अब इस बार मिस्त्र में ग्रास होप्पर का हमला होता है। पुरे मिस्त्र में ग्रास होप्पर भर जातें है। लेकिन फिर भी फेरों अपने फैसले को नहीं बदलता।

मजबुरी में ईश्वर को फिरसे मिस्त्र पर अपना प्रकोप दिखाना पड़ता है। इस बार पुरे मिस्त्र में मक्खियों का हमला होता है और पुरा मिस्त्र मक्खियों से भर जाता है। हारकर फेरों फिर से मोसेस के पास जाकर विनती करने लगता है कि वह मिस्त्र को इन मक्खियों से आज़ाद करवाए। ऐसा करने से वापस मिस्त्र से मक्खिया गायब हो जाती है। लेकिन फेरों फिर से अपने बात से मुकर जाता है और लोगों को आज़ाद करने से मना कर देता है।

इसके बाद मिस्त्र के सारें जानवर बीमार होने लग जाते है। बकरियाँ, ऊँथ, घोड़े आदि जानवर धीरे-धीरे मरने लगते है। फिर इसके बाद पुरे मिस्त्र मे महामारी फैल जाती है। लोगों को भयंकर बिमारियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन फेरों अपना इरादा नहीं बदलता।

अब ईश्वर समझ चुके थे की उन्हें फेरों को कड़ी सज़ा देनी होगी। ईश्वर मोसेस से कहते है, “मोसेस जाओ जितने भी हिब्रू लोग है उनके घरों में निशान लगा दो। आज मैं उन सारें बच्चों को लेकर जाऊंगा जो मिस्त्र के लोगों के है।”

मोसेस वही करता है जैसा उसे ईश्वर ने कहा था। वह सारें लोगो के घर मे निशान लगाता है जो हेब्रु लोगों के थे।

रात को मौत का सौदागर आता है और सारें बच्चों की रूह को अपने साथ लेकर चले जाता है। जिसमे फेरों का बेटा भी शामिल होता है। अब फेरों पूरी तरह से हार मान चुका था। वह निर्णय लेता है की वह लोगों को आज़ाद कर देगा और उन्हें जाने देगा।

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लोगों की अजादी

फेरों लोगों को आज़ाद कर देता है और मोसेस अपने लोगों को लेकर ऐसी जगह लेकर जाता है जहाँ ईश्वर ने उसे कहा था।

इस कहानी में फेरों एक राजा यह भुल जाता है की ईश्वर सबसे ऊपर है जिससे कोई भी नही जीत सकता। अंत मे वही होता है जो सही था।

मोसेस की यह कहानी आपको कैसी लगी आप हमे कमेंट करके जरूर बताए और इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले।

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